परिस्थितियाँ बता रही है पर करुँ क्या समझ में नहीं आ रहा है इधर ही रुख जाऊँ या आगे बढूँ ताकि आगे जाकर अकेले में पछताना न पड़े भीड़ में बदनाम होना न पड़े क्योंकि परिणाम पता चल रही है। वास्तव में सच यही है कि लुगाई को अपनी ससुराल में रखें या न रखें मायके में तो बिल्कुल नहीं रखना चाहिए वजह जो भी हो या मजबूरी जो भी हो।। क्योंकि अपनी घर में कुत्ति भी शेरनी बन जाती है वैसे ही बीवी अपनी मर्जी की मालकिन बन जाती है तब बीवी की नखरे नहीं झेल पाएंगे दूरियाँ बनती रहेंगी छोटी-छोटी बातें भी परेशान लगेगा तब अकेले में आँसू पीना पड़ेगा। रुख जाना है तो अब ही रुख जाना बेहतर है वरना लड़ाई – झगड़ों के बीच बाल-बच्चे होने के बाद तो पाप होगा या अभिशाप बनेगा
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