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मेरे जिले: नंद्याल की विशेषता

 ## मेरे ज़िले की विशेषता: नंद्याल (आंध्र प्रदेश) > **"जहाँ आस्था का दीप जलता है, नल्लामाला के जंगल लहराते हैं और हर दिल में रायलसीमा की संस्कृति धड़कती है—वही है मेरा नंद्याल।"** >  आंध्र प्रदेश के समृद्ध और ऐतिहासिक रायलसीमा क्षेत्र में स्थित **नंद्याल ज़िला (Nandyal District)** केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्मिकता, कृषि और बदलती आधुनिकता का एक अद्भुत संगम है। अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट, प्राचीन मंदिरों और मिठास भरे जन-जीवन के कारण यह ज़िला पूरे राज्य में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। ### 1. नव नंदी की पवित्र भूमि (आस्था और अध्यात्म) नंद्याल शब्द की उत्पत्ति ही भगवान शिव के वाहन **'नंदी'** के नाम पर हुई है। इस ज़िले की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित **'नव नंदी'** (नौ प्रसिद्ध नंदी मंदिर) हैं, जो ज़िले के विभिन्न कोनों में फैले हुए हैं:  * **महानंदी (Mahanandi):** यहाँ का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। महानंदी मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड का पानी इतना स्वच्छ और शीतल है कि गहराई में पड़ा सिक्का भी साफ़ दिखाई देता है। वर्ष ...

नहीं चाहिए प्रभु हमें तुम्हारी भाषा

 नहीं चाहिए प्रभु हमें, तुम्हारी भाषा

नहीं चाहिए प्रभु हमें तुम्हारी भाषा 

नहीं चाहिए।।

देश की एकता बढ़ाने के लिए कह कर 

कोशिश कीजिए हम सहारा देंगे माने कहकर 

हमसे नए-नए संस्थाओं को खुलवा कर 

रहे हैं आप उच्च पद पर।।

हमारे ऊपर राज़ करने के लिए…

हमें नीचे गिरा के 

हमें मानसिक रूप से हराने के लिए ...

तुम्हारी भाषा को हमारे ऊपर चढ़ाकर 

उसकी भार ज्यादा हो गया तो भी 

नीचे नहीं रखना है एवं 

कुछ कमी नहीं रहना है माने 

शर्त लगाते हुए 

तुम्हारे मातृभाषा की बल से 

हमारी मातृभाषा को भुलाने में लगे हुए हैं।

मगर एक बात याद रख सबको मातृभाषा होती है

हर मातृभाषा के अपना महत्व होता है 

उसके असर हर जगह दिखाने जरुरत नहीं…

अतएव तुम्हारे मातृभाषा के महत्व अधिक दिखाने हेतु

 हमारे मातृभाषा के महत्व को कम समझना मत।। 

जैसे तुम लोगों को अंग्रेजी सिर्फ भाषा है ,

तेलुगु सिर्फ भाषा है, तमिल सिर्फ भाषा है 

वैसे ही हमें, हिंदी भी भाषा ही है ना की ज्ञान…

भाषा को भाषा जैसा रहने दीजिए वरना 

संस्कृत जैसे अपनों के घर में ही सीमित रहकर

बाद में गायब हो जाएगी।।

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