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मेरे जिले: नंद्याल की विशेषता

 ## मेरे ज़िले की विशेषता: नंद्याल (आंध्र प्रदेश) > **"जहाँ आस्था का दीप जलता है, नल्लामाला के जंगल लहराते हैं और हर दिल में रायलसीमा की संस्कृति धड़कती है—वही है मेरा नंद्याल।"** >  आंध्र प्रदेश के समृद्ध और ऐतिहासिक रायलसीमा क्षेत्र में स्थित **नंद्याल ज़िला (Nandyal District)** केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्मिकता, कृषि और बदलती आधुनिकता का एक अद्भुत संगम है। अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट, प्राचीन मंदिरों और मिठास भरे जन-जीवन के कारण यह ज़िला पूरे राज्य में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। ### 1. नव नंदी की पवित्र भूमि (आस्था और अध्यात्म) नंद्याल शब्द की उत्पत्ति ही भगवान शिव के वाहन **'नंदी'** के नाम पर हुई है। इस ज़िले की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित **'नव नंदी'** (नौ प्रसिद्ध नंदी मंदिर) हैं, जो ज़िले के विभिन्न कोनों में फैले हुए हैं:  * **महानंदी (Mahanandi):** यहाँ का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। महानंदी मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड का पानी इतना स्वच्छ और शीतल है कि गहराई में पड़ा सिक्का भी साफ़ दिखाई देता है। वर्ष ...

पर्वत प्रदेश में पावस सारांश

 पर्वत प्रदेश में पावस सारांश 


इस कविता के कवि श्री सुमित्रानंदन पंत जी है। उसका जीवन काल 1900-1977 माना जाता है। उनसे रचित कविता का नाम पर्वत प्रदेश में पावस । इस कविता में -

  1.  वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्र में प्रकृति हर पल अपने रूप को बदलती है।
  2.  मेखलाकर पर्वत हजारों सुमन रूपी आँखों से नीचे तालाब में अपने रूप को देख रहे हैं।
  3. झाग भरे झरने झर-झर नाद कर रहे हैं।
  4.  महत्वकांक्षाओं से भरे पेड बिना पलक आकाश की ओर देख रहे हैं।
  5.  अचानक बादलों के आगमन से मानो पर्वत कहीं उड गये हैं।
  6.  वर्षा की तेज से ऐसा लगता है कि धरती पर आकाश टूट पड़ा हो ।
  7. भय से विशाल शाल वृक्ष जमीन में धंस गये हैं।
  8. वर्षा की तेजी से आये धुआँ मानो तालोबों में आग लगा दी गई है।
  9. यह सब देख लगता है कि इंद्र अपने जादू का खेल खेल रहे हैं।

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