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मेरे जिले: नंद्याल की विशेषता

 ## मेरे ज़िले की विशेषता: नंद्याल (आंध्र प्रदेश) > **"जहाँ आस्था का दीप जलता है, नल्लामाला के जंगल लहराते हैं और हर दिल में रायलसीमा की संस्कृति धड़कती है—वही है मेरा नंद्याल।"** >  आंध्र प्रदेश के समृद्ध और ऐतिहासिक रायलसीमा क्षेत्र में स्थित **नंद्याल ज़िला (Nandyal District)** केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि प्रकृति, आध्यात्मिकता, कृषि और बदलती आधुनिकता का एक अद्भुत संगम है। अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट, प्राचीन मंदिरों और मिठास भरे जन-जीवन के कारण यह ज़िला पूरे राज्य में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। ### 1. नव नंदी की पवित्र भूमि (आस्था और अध्यात्म) नंद्याल शब्द की उत्पत्ति ही भगवान शिव के वाहन **'नंदी'** के नाम पर हुई है। इस ज़िले की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ स्थित **'नव नंदी'** (नौ प्रसिद्ध नंदी मंदिर) हैं, जो ज़िले के विभिन्न कोनों में फैले हुए हैं:  * **महानंदी (Mahanandi):** यहाँ का सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। महानंदी मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक जलकुंड का पानी इतना स्वच्छ और शीतल है कि गहराई में पड़ा सिक्का भी साफ़ दिखाई देता है। वर्ष ...

किस तरह प्रेम चाहिए -Raavan Paul Khan.MD

             किस तरह प्रेम चाहिए

 तुझे किस तरह प्रेम चाहिए इशारा करो प्रेयसी

 मैं उस तरह ही प्यार देना चाहता हूँ ।

आदिकालीन वीर,शूर राजाओं के

भावनाएँ निहित वीररसात्मक प्रेम जैसा हो,

 भक्तिकालीन राधा-कृष्ण , आत्मा परमात्मा के

 भावनाएँ निहित आदर्श प्रेम जैसा हो ,

 रीतिकालीन रसीले छैल-छबीली प्रेमी युगल की 

भावनाएँ निहित श्रृंगार भरी प्रेम जैसा हो,

 भारतेंदु कालीन प्रज्वलित किया गया मशाल की

 भावनाएँ  निहित देश प्रेम  जैसे  हो,

 द्विवेदी कालीन सुधारवादी प्रेम जैसा हो ,

छायावाद कालीन रहस्यवाद प्रेम जैसा हो,

 प्रगतिवाद कालीन मार्क्सवादी प्रेम जैसा हो ,

प्रयोगवाद कालीन संवेदना भरी प्रेम जैसा हो ,

या 

 गध्य कालीन उपन्यास -कहानी- नाटक- निबंध आदि के द्वारा

 कह जाने वाला लंबी पत्र प्रेम जैसा हो।

 किस तरह प्रेम चाहिए प्रेयसी ।।

 एक बार इशारा करो उस रास्ता को ही अपनाऊंगा 

नहीं तो बाकी अन्य गध्य विधाओं जैसे

 जीवन के अंत में रेखाचित्र- संस्मरण- यात्रा वृतांत-

 आत्मकथा-जीवनी-डायरी आदि के द्वारा 

आधे रातों में,अंधेरों में,अज्ञात वासियों को कहते हुए

 आहें भर लेता हूँ । अतः पूछ रहा हूँ फिर एक बार 

कहो मेरी शहजादी 

 किस तरह प्रेम चाहिए तुझे ।।

यह भी नहीं जानता हूँ कि

मेरा प्रेम किस तरिका में प्रस्तुत करना है 

क्योंकि 

मैं प्रेम को जानता हूँ  हिंदी साहित्य से ही।।

इसलिए प्रेम को समझाने के लिए 

इस नए तरीके को अपनाया हूँ। 

लेकिन तुम यह  मत भूलना कि 

किस तरह की प्रेम चाहिए बताना ।। 

                              

                                      - रावण.MD



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