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लिंग बनने का तरीका

 लिंग :   स्त्री जाति/ पुरुष जाति के बारे में बताने वाले शब्द को लिंग कहते हैं।  उदाहरण:  पुं  लिंग - स्त्री लिंग     माता - पिता       राम - सीता       लड़का - लड़की  लिंग 12( बारह) तरीकों प्रत्यय से बनता है।  1. अ ,2.आनी,3.आइन,4.इनी,5.इया,6.इका,7.इन,8.ई,9.नी,10.वती/मति,11.त्री,12. प्रत्यय फ्री (No suffix)         

वाच्य (Voice)

 वाच्य (Voice)

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि क्रिया का मुख्य विषय 'कर्ता', 'कर्म' अथवा 'भाव' है उसे वाच्य कहते हैं। वाक्य में 'कर्ता', 'कर्म' या 'भाव' में से जिसकी प्रधानता होती है. उसी के अनुसार क्रिया के पुरुष, लिंग और वचन होते हैं।

हिंदी में वाच्य के तीन भेद हैं-

1. कर्तृवाच्य (Active voice)

2. कर्म वाच्य (Passive voice)

3. भाव वाच्य (Inpersoual voice)

1. कर्तृवाच्य : इसमें कर्ता की प्रधानता होती है क्रिया का सीधा संबंध कर्ता से होता है। क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष 'कर्ता' के अनुसार ही होते हैं। कर्तृवाच्य में सकर्मक क्रिया के वाक्य और अकर्मक क्रिया के वाक्य होते हैं

जैसे- मोहन पाठ पढ़ता है। (सकर्मक क्रिया)

सहदेवी हंसती है। (अकर्मक क्रिया)

उपर्युक्त दो वाक्यों में से क्रिया के लिंग और वचन (पढ़ता) कर्मा 'मोहन' के अनुसार पुलिंग में है। दूसरे वाक्य में कर्ता 'सहदेवी' के अनुसार क्रिया (हंसती) स्त्रीलिंग में है।

2.कर्मवाच्य : इसमें कर्म की प्रधानता होती है। क्रिया का सीधा संबंध कर्म से होता है। क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्म के अनुसार बदलते हैं। इसमें केवल सकर्मक क्रियाएँ होती हैं।

जैसे- कृष्ण से कंस मारा गया।

यस्वंत से पत्र लिखा जाएगा।

जस्वंत से कमल खरीदी जाती है।

उपर्युक्त वाक्यों में क्रमशः कंस, पत्र, कलम, कर्म हैं। इनमें से पहले दो शब्द (कर्म)

कंस, पत्र पुल्लिंग हैं। इसलिए क्रियाएँ भी उसी के अनुसार (मारा गया, लिखा जाएगा) पुल्लिंग में हैं। तीसरा शब्द (कर्म) ‘कलम’ स्त्रीलिंग होने के कारण क्रिया भी (खरीदी जाती है) स्त्रीलिंग में है।

3.भाववाक्य : इसमें न कर्ता की प्रधानता होती है और न कर्म की। इसमें भाव ही मुख्य होता है। इसमें केवल अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है। इसमें क्रिया हमेशा पुल्लिंग एकवचन तथा अन्य पुरुष में रहती है। इनका अधिक प्रयोग निषेधार्थक (Negative) वाक्यों में होता है।

जैसे- मुरली से पढ़ा नहीं जाता।

सीता से लिखा नहीं जाता।

वाच्य परिवर्तन :

(i) सकर्मक कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित किया जा सकता है।

(ii) अकर्मक या निषेधार्थक कर्तृवाच्य को भाववाच्य में बदला जा सकता है।

कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में बदलने के नियम :

(Change of active into passive voice)

कर्मवाच्य केवल सकर्मक क्रिया से बनाया जाता है।

(अ)कर्तृवाच्य के कर्ता के साथ ‘से’ (कभी-कभी ‘के द्वारा’) विभक्ति जोड़कर उसे करण कारक बना दिया जाता है।

जैसे-

राम-राम से, सीता ने-सीतासे,

मैंने-मुझसे या मेरे द्वारा आदि।

(आ) कर्म यथातथ्य लिखना चाहिए।

(इ)कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में परिवर्तित करना चाहिए।

जैसे- खा-खाया, खाई, खाए। लिख-लिखा, लिखी, लिखे आदि।

ई) सामान्य भूतकाल में परिवर्तित मुख्य क्रिया के साथ ‘जा’ धातु जोड़कर उसे संयुक्त क्रिया बना दिया जाता है।

जैसे- खाता है-खाया जाता है। पढ़ेगी-पढ़ी जाएगी। लिखा-लिखा गया आदि।

(उ) कर्मवाच्य की क्रिया के लिंग और वचन कर्म के अनुसार कर दिये जाते है तथा काल कर्तृवाच्य क्रिया के अनुसार होता है।

सकर्मक कर्तृवाच्य

राम ने रावण को मारा

मैं पत्र लिखता हूँ

किरण फिल्म देखेगा

कर्मवाच्य

राम से रावण मारा गया।

मुझसे पत्र लिखा जाता है।

किरण से फिल्म देखी जाएगी।

कर्तृवाच्य को भाववाच्य में बदलने के नियम

(Change of Active into Inpersonal voice):

भाववाच्य केवल अकर्मक क्रियाओं से ही बनते हैं। अर्थात् इसमें ‘कर्म’ नहीं होता।

(अ) कर्तृवाच्य के कर्ता के साथ ‘से’ या ‘के द्वारा’ जोड़ा जाता है।

(आ) भाववाच्य में ‘क्रिया’ ही प्रधान है।

(इ) इसमें क्रिया को सामान्य भूतकाल में लाकर उसके साथ ‘जाता’ क्रिया का रूप जोड़ा जाता है।

ई) क्रिया हमेशा अन्य पुरुष, पुलिंग एकवचन में रहती है। तथा काल कर्तृवाच्य क्रिया के अनुसार ही होता है।

अकर्मक कर्तृवाच्य

वह नहीं सोता।

मौसमी हँसती है।

कार्तिक बैठ नहीं सकता

भाववाच्य

उससे सोया नहीं जाता।

मौसमी से हँसा जाता है।

कार्तिक से बैठा नहीं जाता।

अभ्यास :

वाच्य बदलिए :

1. राम ने रोटी खाई। (कर्तृ)

राम से रोटी खाई गई (कर्म) (रोटी-स्त्रीलिंग)

2. मोहन ने आम खाया। (कर्तृ)

मोहन से आम खाया गया। (कर्म) (आम-पुलिंग)

3. मैंने किताब पढ़ी। (कर्तृ)

मुझसे किताब पढ़ी गई। (कर्म) (किताब-स्त्रीलिंग)


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